उसको अपने घर में कभी लड़की होने का ताना नहीं मिला, उसकी पढाई-लिखाई पर उसके माँ-बाप ने शायद उसके भाई से ज्यादा खर्च किया ... इधर-उधर , यहाँ-वहां, जहाँ-तहाँ जाने-आने की कोई पाबन्दी नहीं! उसे कभी एहसास ही नहीं हुआ की उसका भाई और वो कोई अलग चीज़ हैं!
नाचने-गाने, बोलने-चलने में वह हमेशा से भाई से आगे रही। जैसे ही कोई मेहमान आता , पापा आवाज़ लगाते तनु बेटा! आना, ज़रा अंकल को वो 'जोनी- जोनी' वाली पोएम सुनाओ.. वाह बेटा बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया ! अच्छा बेटा! अब वो 'शावा-शावा' वाला डांस करके दिखाओ ! वाह बेटा! तुम तो बहुत 'टैलेंटेड' हो ! थैंक यू अंकल, थैंक यू आंटी कहकर वो फुदकती हुई घर के भीतर भाग जाती !
नाचने-गाने, बोलने-चलने में वह हमेशा से भाई से आगे रही। जैसे ही कोई मेहमान आता , पापा आवाज़ लगाते तनु बेटा! आना, ज़रा अंकल को वो 'जोनी- जोनी' वाली पोएम सुनाओ.. वाह बेटा बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया ! अच्छा बेटा! अब वो 'शावा-शावा' वाला डांस करके दिखाओ ! वाह बेटा! तुम तो बहुत 'टैलेंटेड' हो ! थैंक यू अंकल, थैंक यू आंटी कहकर वो फुदकती हुई घर के भीतर भाग जाती !
भाई जब नाह-धो रहा होता, तनु को आवाजें लगायीं जाती .. तनु बेटा! उठ जाओ, देखो भैया नाह-धो कर तैयार भी हो गया, तनु बेटा अब तो बस के आने का टाइम हो गया है ... उठो बेटा ! दूर से कितनी भी आवाजें उसके कान में पढ़ जायें वह करवट तक नहीं बदलती, पापा आते और प्यार से माथे पर हाथ सहलाते हुए कहते उठ जा मेरे राजा बेटे
.. राजा बेटा
उठा उठा उठा .. इस बीच माँ भी आ जाती और गोद में उठा कर बाथरूम की तरफ ले जाते हुए कहती जाती, अरे तनु तो प्यार बच्चा है, मम्मी-पापा को बिलकुल तंग नहीं करता! देखो कैसे जल्दी जल्दी तैयार होगा !
बस आती, भैया तनु का भी स्कूल बेग लेकर चढ़ता। मम्मी-पापा दोनों हाथ हिलाते हुए कहते 'बाय-बाय' बेटा ... स्कूल में शरारत नहीं करना दोनों, कैंटीन से कुछ उटपटांग नहीं खाना! बस आगे चल पड़ती। शाम में भैया बस से पहले उतरता और हाथ पकड़ कर बाद में तनु को उतारता !
दोनों के लिए एक ही प्रश्न होता
.. क्या क्या किया आज स्कूल में बेटा ?
होम वर्क क्या मिला है ?
चलो पहले कपडे बदल लो
.. भैया बदल चूका होता और तनु पिल्लों को खिलाने लग जाती ..फिर माँ की आवाज़ आती तनु बेटा! ..चलो पहले जल्दी से कपडे बदलो फिर खेलना।
इसी क्रम में तनु सायानी हो गयी ... घर के भी कई काम सीख गयी। शाम में पापा दफ्तर से आते तो तनु को आते ही आवाज़ मारते तनु बेटा! ज़रा एक गिलास पानी ले आना .... पर कॉलेज की पढाई भी माँ-पापा ने अच्छे से करवाई, डिबेट वगेरेह में अव्वल रहने पर कुछेक छात्र संगठन के प्रतिनिधि उससे चुनाव में खड़े होने की गुहार लगाने घर भी आये तो किसी ने कोई एतराज़ नहीं जताया। कोई आता तो माँ बिना ज्यादा सवाल किये फट से आवाज़ लगा देती ..तनु बेटा! तुमसे मिलने कोई आया है।
कॉलेज ख़तम हुआ और शादी-ब्याह के रिश्ते आने लगे .. तनु बेटा चाय की ट्रे के साथ आये गए दिन लड़कों से मुलाक़ात करती!.....
बिदाई के समय जब पापा ने ससुराल वालों से कहाँ 'हमने अपनी बेटी को बेटे की तरह पाला है, इसका पूरा ख्याल रखना ... तो तनु खुद को रोक न पायी ... बोली हाँ पापा 'तनु बेटा! तनु बेटा! तनु बेटा! तनु बेटा .... बेटा ..बेटा कहकर जो बढ़ा किया है!