Monday, March 25, 2013

आशा !




सपने कौन नहीं बुनता ?
एक दिन मैंने भी बुन लिए!
सपनो से आशा किसकी नहीं जुडती ?
एक दिन मेरी भी जुड़ गयी !
आशा निराशा में कब नहीं बदलती ?
एक दिन मेरी भी बदल गयी !
निराशा से 'निर' कब तलक जुड़ा  रहता ?
एक दिन आशा फिर दमक गयी !
आशा को सफलता कब तलक नहीं मिलती?
आखिर तो मिल ही गयी !
एक बार फिर , सपने कौन नहीं बुनता ?
मैंने भी बुन लिए और, 
आशा फिर से जुड़ गयी !


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